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बिहार की पांच राज्यसभा सीटों पर चुनावी महाकहास, बीजेपी के खाते में दो सीटें और पवन सिंह की एंट्री की संभावनाएँ

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पटना: बिहार में अगले महीने 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल गर्म हो गया है। राज्यसभा की 37 सीटों के लिए चुनाव की तारीख सामने आने के साथ ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाएँ तेज हो गई हैं। इनमें बिहार का चुनाव सबसे दिलचस्प माना जा रहा है क्योंकि यहाँ पांच सीटों पर प्रतिस्पर्धा होगी, जिनमें से दो सीटें राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की हैं। मौजूदा विधानसभा गणित के अनुसार आरजेडी के पास राज्यसभा में किसी भी उम्मीदवार को भेजने की ताकत नहीं है, जिससे पार्टी नेतृत्व के लिए यह चुनौतीपूर्ण स्थिति बन गई है।
बीजेपी और एनडीए की रणनीति:
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, बिहार में इस बार बीजेपी के खाते में कम से कम दो सीटें जाने की संभावना है। जेडीयू अपनी दोनों मौजूदा राज्यसभा सीटों पर फिर से अपने वरिष्ठ नेताओं को उतार सकती है। इसमें उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह और केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर शामिल हैं। दोनों नेताओं का राज्यसभा में प्रभाव और अनुभव काफी बड़ा माना जाता है।
पंचम सीट की जंग:
पाँचवीं सीट पर विभिन्न दावेदारों के बीच सियासी खेल चल रहा है। एनडीए में इस सीट के लिए लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के चिराग पासवान का दावा सबसे मजबूत माना जा रहा है। वहीं, राष्ट्रीय लोक मोर्चा के उपेंद्र कुशवाहा की राजनीतिक स्थिति इस चुनाव में अनिश्चित दिखाई दे रही है। उनके पास कम संख्या में विधायक होने के कारण वे अन्य सहयोगियों के समर्थन पर निर्भर होंगे।
राजनीतिक और सियासी चेहरों की संभावित एंट्री:
एक और दिलचस्प चर्चा बिहार में भोजपुरी अभिनेता और लोकप्रिय चेहरे पवन सिंह को लेकर है। विधानसभा चुनाव के दौरान पवन सिंह ने पार्टी प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाई थी और राजनीतिक सियासी गलियारों में माना गया था कि उनकी राज्यसभा में एंट्री का समझौता पहले से तय है। अगर यह सत्य होता है, तो पवन सिंह की एंट्री राज्यसभा में मनोरंजन और सियासी जोड़-तोड़ के लिए चर्चा का विषय बनेगी।
राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया:
निर्वाचन आयोग ने बिहार सहित 10 राज्यों की 37 सीटों के लिए चुनाव की प्रक्रिया की अधिसूचना जारी कर दी है। नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया 26 फरवरी से शुरू होगी और 5 मार्च तक चलेगी। नामांकनों की जांच 6 मार्च को होगी, जबकि उम्मीदवार 9 मार्च तक अपने नामांकन वापस ले सकते हैं। मतदान 16 मार्च को संपन्न होगा और परिणाम की घोषणा के बाद नए सदस्य राज्यसभा में शामिल होंगे।
संभावित परिणाम और राजनीतिक समीकरण:
इस चुनाव में केवल संख्या बल ही निर्णायक नहीं होगा, बल्कि पार्टी रणनीति, वरिष्ठ नेताओं की स्थिति, सहयोगी दलों के साथ तालमेल और दावेदारों की लोकप्रियता भी परिणाम तय करेगी। आरजेडी के लिए दो सीटों पर हार का खतरा है, जबकि बीजेपी और जेडीयू के गठबंधन के लिए यह मौका अपने प्रभाव को मजबूत करने का भी है। वहीं, पवन सिंह की संभावित एंट्री और कुशवाहा की अनिश्चित स्थिति बिहार चुनाव को और दिलचस्प और बहु-रंगी बना रही है।

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